Bhagavad Geeta Quote

Bhagavad Geeta Quote

Saturday, February 7, 2015

"कुछ चीज़े हमेशा अधूरी रह जाती है या फिर कुछ लोग उन्हें पूरा करने से डरते है"

आज मुझे अपने ही कहे हुए शब्द याद आ रहे हैं "कुछ चीज़े हमेशा अधूरी रह जाती है या फिर कुछ लोग उन्हें पूरा करने से डरते है" बड़े जोश से मैंने 3 महीने पहले ही विपश्यना Meditation का पंजीकरण करा लिया जो की 10 दिन की साधना थी Meditation के ज़रिये अपने शरीर को समझने की। सब दोस्तों को भी बताया आखिर, वो दिन भी आ गया जब मुझे वहां जाना था 4th Feb. 2015. वहां के सब नियम कानून पढ़े और बड़ी जोश में कहा की में तयार हूँ. और बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट कर अंदर दाखिल हुआ. और उसी दिन रात 8 बजे अपनी साधना आरम्भ की.. जैसे जैसे दिन बीतते गए वहां का अकेलापन मुझे काटने लगा, फिर जाना की शायद सही जगह पर गलत इंसान आ गया, जैसे तैसे करके 3 दिन पूरे किये और वहां से एक हारे हुए सिपाही की तरह पीठ दिखा कर वापस आ गया. लोगों की नज़रों में मैं हार गया था पर मेरी सबसे बड़ी जीत ये रही की मैंने वो हार स्वीकार की और एक कदम और आगे बढ़ा।


Sunday, November 9, 2014

ग़लत है

कल काफी दिनों बाद दुःख हुआ ,आंसू निकले, जो ग़लत है 
कल फिर मुझे इंसानो जैसा महसूस हुआ , जो ग़लत है
वाही अपने अस्तित्व की तलाश में दूसरों पर निर्भर रहना, जो ग़लत है
मोह, माया,राग,विराग,ईर्ष्या,क्रोध,कलेश में खुद को ही भूल जाना,जो ग़लत है
एक बार खुद से पूछ कर तो देखो की चाहते क्या हो ।
फिर पता चलेगा की आज तक जो भी किया वो गलत है।
कुछ पाने की इच्छा में अपना सब कुछ गवा देना, जो ग़लत है
एक बार अपना सब कुछ त्याग कर तो देखो।
पता चलेगा की आज तक जो भी पाया ,वो ग़लत है।
हम कर्म करने से पहले पाने की इच्छा रखते हैं
कुछ पाने के लिए सब कुछ करते हैं, जो ग़लत है



Monday, September 3, 2012

गिरना गलत नहीं है गिर का न उठना गलत है

जब सोचा कुछ नया करने को सिर्फ 1 धुंदली सी मंजिल थी जिस तक जाने के लिए न कोई रास्ता था न कोई प्रेणना. एक दिन देखा कुछ काले कपड़ो में नौजवानों को चिल्लाते हुए पहले थोड़ी मुस्करात आई मेरे चहरे पर फिर  धीरे धीरे एक आवाज़ मेरे कानों को चीरती हुयी निकली जब देखा उस और तो उस्सी आवाज़ में वो आक्रोश वो गुस्सा भी था जो शायेद हम कभी अपनी जिंदगी में लाने से डरते है और फिर उस्सी आवाज़ के साथ नाटक का मध्यांतर हुआ..कुछ लोगों ने सोचा की नाटक यहीं खत्म हो गया पर असली नाटक वहा से शुरू हुआ था...उस दिन उस आवाज़ ने उस गुस्से ने मुझे इतनी अन्दर तक तोड़ दिया की उस्सी आवाज़ को सुनने के लिए में हर रोज़ पूरी दिल्ली में भटकता, कुछ दोस्त मुझे पागल कहते थे तो कुछ सनकी...फिर आखिरकार मैंने सोच ही लिया उस संस्था के साथ जुड़ने का जहाँ से मुझे अपनी मंजिल थोड़ी साफ़ होती दिख रही थी....और रास्ते पर चलने के लिए एक प्रेणना भी मिल गयी जिसके सहारे में हर रोज़ अपनी एक नयी शुरुवात करता. आज उस्सी रास्ते पर चलते चलते १ साल हो गया और साथ ही धुंदली मंजिल का बादल थोडा थोडा साफ़ होता दिख रहा था इस एक साल में काफी बार गिरा फिर उठा...और जाना की "गिरना गलत नहीं है गिर का न उठना गलत है" और भी काफी कुछ सिखाया उस गुरु ने जो शायेद शब्दों में ब्यान नहीं हो सकता...पर मेरे व्यक्तित्व में साफ़ झलकता है....और "अस्मिता" का शुक्ष्म मतलब जाना "पहचान" जो हम सब एक समय पर आकर कहीं न कहीं खोने से लगते हैं उसे बनाने में मेरा साथ दिया...

Friday, May 18, 2012

Asmita Theatre Group

अस्मिता थिएटर अपनी एक अलग दुनिया है।ये एक अद्भुत परिवार है,एक ऐसा परिवार जो एक दूसरे के लिए तो दिन रात खड़ा ही है,दूसरों की मदद के लिए भी सबसे आगे है..न जाने कितनी बार मैंने देखा कि अस्मिता के सदस्य कभी किसी की मदद के लिए रक्तदान करने तो कभी किसी मोहल्ले-बस्ती की सफाई में श्रमदान करने निकल पड़ते हैं।एक एसएमएस एक-एक मोबाइल से न जाने कहां कहां पहुंच जाता है।...दिल्ली की ये सड़के उन रातों को जूतों के निशानों को अपने ज़ेहन से मिटा नहीं पाई हैं,जब अस्मिता थिएटर को इसी दिल्ली ने नाटक करने से प्रतिबंधित कर दिया था।अरविंद सर  उस दौर में हर रात मंडी हाउस से शाहदरा अपने घर तक पैदल जाया करते थे और शायद वो ही न झुकने की ज़िद उनके अंदर आज भी कूट कूट कर भरी है..

Tuesday, April 24, 2012

Ek aur koshish



मेरी ये कुछ पंक्ति उन् साथियों  के नाम...जिनोहें अपनी निस्वार्थ और इमानदार कोशिश से  समाज को बदलने की कोशिश की है और कहीं हद तक सफल भी हुए हैं
.
क्या है ये काला कुर्ता...?

धुंदली आँखों के लिए रोशिनी है,ये काला कुर्ता 
या फिर उस रोशिनी को पाने की उम्मीद है ,ये काला कुर्ता 
क्या है ये काला कुर्ता...? 
ठन्डे कोयलों में चिंगारी है ,ये काला कुर्ता 
या फिर चिंगारी को आग में बदले की कोशिश है ,ये काला कुर्ता
क्या है ये काला कुर्ता...?
आओ आओ नाटक देखों की गूँज है,ये काला कुर्ता 
या फिर उस नाटक से बदलाव की उम्मीद है ये कला कुर्ता 
क्या है ये काला कुर्ता...?
चंद नौजवानों का पसीना है,ये कला कुर्ता
या फिर उस पसीने को मिलती लोगों की तालियाँ है,ये कला कुर्ता  
क्या है ये काला कुर्ता...? 
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अब पता चला की क्या है ये काला कुर्ता
शायेद दूसरों को जगाने की ज़रुरत है,ये काला कुर्ता
और साथ में खुद में बदलाव की कोशिश है ये काला कुर्ता .




Sunday, March 4, 2012

Thanx"ASMITA"

2day i went 2 distribute slips aftr 5 month n i observed a huge chnge in my behaviour as camppre 2 last tym...as a result i distrbutd around 70-80 slips where 99% people accpted it....Thanx "ASMITA"