अस्मिता थिएटर अपनी एक अलग दुनिया है।ये एक अद्भुत परिवार है,एक ऐसा परिवार जो एक दूसरे के लिए तो दिन रात खड़ा ही है,दूसरों की मदद के लिए भी सबसे आगे है..न जाने कितनी बार मैंने देखा कि अस्मिता के सदस्य कभी किसी की मदद के लिए रक्तदान करने तो कभी किसी मोहल्ले-बस्ती की सफाई में श्रमदान करने निकल पड़ते हैं।एक एसएमएस एक-एक मोबाइल से न जाने कहां कहां पहुंच जाता है।...दिल्ली की ये सड़के उन रातों को जूतों के निशानों को अपने ज़ेहन से मिटा नहीं पाई हैं,जब अस्मिता थिएटर को इसी दिल्ली ने नाटक करने से प्रतिबंधित कर दिया था।अरविंद सर उस दौर में हर रात मंडी हाउस से शाहदरा अपने घर तक पैदल जाया करते थे और शायद वो ही न झुकने की ज़िद उनके अंदर आज भी कूट कूट कर भरी है..
कुछ चीज़े हमेशा अधूरी रह जाती है ....या फिर कुछ लोग उन्हें पूरा करने से डरते हैं
Bhagavad Geeta Quote
Friday, May 18, 2012
Tuesday, April 24, 2012
Ek aur koshish
मेरी ये कुछ पंक्ति उन् साथियों के नाम...जिनोहें अपनी निस्वार्थ और इमानदार कोशिश से समाज को बदलने की कोशिश की है और कहीं हद तक सफल भी हुए हैं
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क्या है ये काला कुर्ता...?
धुंदली आँखों के लिए रोशिनी है,ये काला कुर्ता
या फिर उस रोशिनी को पाने की उम्मीद है ,ये काला कुर्ता
क्या है ये काला कुर्ता...?
ठन्डे कोयलों में चिंगारी है ,ये काला कुर्ता
या फिर चिंगारी को आग में बदले की कोशिश है ,ये काला कुर्ता
क्या है ये काला कुर्ता...?
आओ आओ नाटक देखों की गूँज है,ये काला कुर्ता
या फिर उस नाटक से बदलाव की उम्मीद है ये कला कुर्ता
क्या है ये काला कुर्ता...?
चंद नौजवानों का पसीना है,ये कला कुर्ता
या फिर उस पसीने को मिलती लोगों की तालियाँ है,ये कला कुर्ता
क्या है ये काला कुर्ता...?
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अब पता चला की क्या है ये काला कुर्ता
शायेद दूसरों को जगाने की ज़रुरत है,ये काला कुर्ता
और साथ में खुद में बदलाव की कोशिश है ये काला कुर्ता .
Sunday, March 4, 2012
Thanx"ASMITA"
2day i went 2 distribute slips aftr 5 month n i observed a huge chnge in my behaviour as camppre 2 last tym...as a result i distrbutd around 70-80 slips where 99% people accpted it....Thanx "ASMITA"
Friday, March 2, 2012
आपको क्या चाईए-"पुस्तकालय" या "मदिरालय"
आज हमारे देश में एक ओर पिछले 5 सालों में 1.5 laakh शराब के ठेके खोले गए तो वहीँ दूसरी ओर.....150 library भी सरकार ने नहीं खोली.इसका मतलब तो ये है की सरकार चाहती ही नहीं की लोग पढ़े लिखे. वो तो चाहती है सिर्फ शराब के नशे में पड़े रहें ओर कोई सवाल न करे........पर अब समय आ गया है अपनी प्राथमिकताओं(priorty) को समजने का की हमे क्या चाईए "मदिरालय या पुस्त्कालये".अगर आज हमने ये नहीं सोचा तो कल हमारे आने वाली पीढ़ी के हाथों में किताबों की जगह शराब की बोतलें होंगी.
Thursday, February 16, 2012
"अस्मिता" एक थीयेटर ग्रुप नही है.. वो एक ऐसा संस्थान हैं जो एक्टर नही बनता बल्कि इंसान बनाता है
ऋषिकेश गंगा घाट पे पहली बार कुछ लोगो को काले कुर्ते पहने केह्ते पाया "आओ आओ नाटक देखो"....कुछ समझ नही आया... फिर देखा एक दाढ़ी वाला आदमी चेहरे पे जिसके एक अजीब सी चमक थी.....एक शान्ति थी... एक क्रांति थी.... गहरा आत्मविश्वास था.... क्रोध था...और साथ थे जोशिये युवा जो भीड़ से अलग थे......इन सभी के चेहरे पे गंगा के पानी से ज्यादा चमक थी......और गंगा से कहीं ज्यादा बहाव था......और उनका प्रतिनिधि ...उनका गुरु मुझे अपने आप में एक संघ्रालय सा दिख रहा था ...नहीं वो एक संस्थान था .....
मैं समझ ना सका ...शायद वो साधु था ... या कोई क्रांतिकारी ...समाज सेवक.. या शायद एक कलाकार ......वो जो भी थे एक नेक इरादे से अपने साथियों को ले निकला था...वे थे श्री अरविंद गौर जी.....जिन्हें दिल्ली का कहना ग़लत होगा क्योंकि वो पूरे देश की आत्मा कि सच्ची आवाज़ हैं अंततः वे दिल्ली मुंबई या इंदौर से नही बल्कि पूरे भारत से हैं....
और उनके साथ हैं उनके शिष्य ,उनके बच्चे ,उनके साथी ...... वे सब अस्मिता ग्रुप से हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ नुक्कड़ नाटक कर रहें हैं..... हम सबके दिल कि बात बेबाकी से खुलेआम रख रहें हैं.....
चाहे वो श्री अरविंद गौर हों या उनके शिष्य सभी के सभी एक बहुत आसान ज़िंदगी जी सकते हैं... उन्हें कोई ज़रूरत नही सड़कों पे उतर आने की...वे ना तो फिल्मों में एक्टर बनना चाहते हैं ..ना ही प्रसिद्धि लूटना चाहते हैं....वे सिर्फ़ एक आवाज़ होना चाहते हैं.... वे ना ही किसी राज्नितिक पार्टी से ताल्लुक रखते हैं ना ही किसी कुर्सी की आशा ...... वे सिर्फ़ और सिर्फ़ पूरे दिल से वो करते हैं जो हर युवा को करना चाहिए ..... ऐसे अस्मिता को शत शत नमन..... ऐसे श्री अरविंद गौर को शत शत नमन....
इस जन्म में इन सभी से मिलना हुआ ....मेरा जीवन सफल हुआ......
अस्मिता एक थीयेटर ग्रुप नही है.. वो एक ऐसा संस्थान हैं जो एक्टर नही बनता बल्कि इंसान बनाता है.
Saturday, August 27, 2011
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