2day i went 2 distribute slips aftr 5 month n i observed a huge chnge in my behaviour as camppre 2 last tym...as a result i distrbutd around 70-80 slips where 99% people accpted it....Thanx "ASMITA"
कुछ चीज़े हमेशा अधूरी रह जाती है ....या फिर कुछ लोग उन्हें पूरा करने से डरते हैं
Bhagavad Geeta Quote
Sunday, March 4, 2012
Friday, March 2, 2012
आपको क्या चाईए-"पुस्तकालय" या "मदिरालय"
आज हमारे देश में एक ओर पिछले 5 सालों में 1.5 laakh शराब के ठेके खोले गए तो वहीँ दूसरी ओर.....150 library भी सरकार ने नहीं खोली.इसका मतलब तो ये है की सरकार चाहती ही नहीं की लोग पढ़े लिखे. वो तो चाहती है सिर्फ शराब के नशे में पड़े रहें ओर कोई सवाल न करे........पर अब समय आ गया है अपनी प्राथमिकताओं(priorty) को समजने का की हमे क्या चाईए "मदिरालय या पुस्त्कालये".अगर आज हमने ये नहीं सोचा तो कल हमारे आने वाली पीढ़ी के हाथों में किताबों की जगह शराब की बोतलें होंगी.
Thursday, February 16, 2012
"अस्मिता" एक थीयेटर ग्रुप नही है.. वो एक ऐसा संस्थान हैं जो एक्टर नही बनता बल्कि इंसान बनाता है
ऋषिकेश गंगा घाट पे पहली बार कुछ लोगो को काले कुर्ते पहने केह्ते पाया "आओ आओ नाटक देखो"....कुछ समझ नही आया... फिर देखा एक दाढ़ी वाला आदमी चेहरे पे जिसके एक अजीब सी चमक थी.....एक शान्ति थी... एक क्रांति थी.... गहरा आत्मविश्वास था.... क्रोध था...और साथ थे जोशिये युवा जो भीड़ से अलग थे......इन सभी के चेहरे पे गंगा के पानी से ज्यादा चमक थी......और गंगा से कहीं ज्यादा बहाव था......और उनका प्रतिनिधि ...उनका गुरु मुझे अपने आप में एक संघ्रालय सा दिख रहा था ...नहीं वो एक संस्थान था .....
मैं समझ ना सका ...शायद वो साधु था ... या कोई क्रांतिकारी ...समाज सेवक.. या शायद एक कलाकार ......वो जो भी थे एक नेक इरादे से अपने साथियों को ले निकला था...वे थे श्री अरविंद गौर जी.....जिन्हें दिल्ली का कहना ग़लत होगा क्योंकि वो पूरे देश की आत्मा कि सच्ची आवाज़ हैं अंततः वे दिल्ली मुंबई या इंदौर से नही बल्कि पूरे भारत से हैं....
और उनके साथ हैं उनके शिष्य ,उनके बच्चे ,उनके साथी ...... वे सब अस्मिता ग्रुप से हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ नुक्कड़ नाटक कर रहें हैं..... हम सबके दिल कि बात बेबाकी से खुलेआम रख रहें हैं.....
चाहे वो श्री अरविंद गौर हों या उनके शिष्य सभी के सभी एक बहुत आसान ज़िंदगी जी सकते हैं... उन्हें कोई ज़रूरत नही सड़कों पे उतर आने की...वे ना तो फिल्मों में एक्टर बनना चाहते हैं ..ना ही प्रसिद्धि लूटना चाहते हैं....वे सिर्फ़ एक आवाज़ होना चाहते हैं.... वे ना ही किसी राज्नितिक पार्टी से ताल्लुक रखते हैं ना ही किसी कुर्सी की आशा ...... वे सिर्फ़ और सिर्फ़ पूरे दिल से वो करते हैं जो हर युवा को करना चाहिए ..... ऐसे अस्मिता को शत शत नमन..... ऐसे श्री अरविंद गौर को शत शत नमन....
इस जन्म में इन सभी से मिलना हुआ ....मेरा जीवन सफल हुआ......
अस्मिता एक थीयेटर ग्रुप नही है.. वो एक ऐसा संस्थान हैं जो एक्टर नही बनता बल्कि इंसान बनाता है.
Saturday, August 27, 2011
Correct Urself
Accept if you are mistaking rather than hiding it but correct it and move
-Shri Arvind Gaur Sir
-Shri Arvind Gaur Sir
What is Acting?
The way of expressing your words to someone else is acting and the person who do this well is a good actor either on stage or in normal life.
-Shri Arvind Gaur Sir
-Shri Arvind Gaur Sir
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